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क्या आप जन सूचना अधिकारी को सबक सिखाना चाहते है ? क्या आप जन सूचना अधिकारी के पदेन कर्तव्यों की समीक्षा सुचना का अधिकार अधिनियम का विधिवत प्रयोग करके दस्तावेजीक प्रमाणों के आधार पर करना चाहते है... तो यह अब आपके लिए आसन हो गया है... क्योकि यह आवेदन आपको दिलवायेगा ऐसे दस्तावेजीक प्रमाण जिसके आधार पर की जा सकती है जन सूचना अधिकारी के कार्यों की समीक्षा...! आवेदन कॉपी करें

  जन सूचना अधिकारी को उसके पदेन कर्तव्य याद दिला दीजिये ! क्या आप सूचना अधिकारी को उसका पदेन कर्तव्य स्मरण  करवाना चाहेंगे ? सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम , 2005 की धारा 4 के अंतर्गत प्रत्तेक शासकीय कार्यालय / विभाग को स्वत: संज्ञान से सभी विभागीय कार्यवाहियों का प्रकटीकरण करना होता है | उल्लेखनीय है कि, विभाग प्रमुख द्वारा PIO Public information officer के माध्यम से उसके द्वारा कारित सभी विभागीय कार्यों और कर्तव्यों का विवरण प्रकटीकरण करने की बाध्यता है …. इसलिए यह आवेदन जन सूचना अधिकारी को उसके पदेन कर्तव्यों का संज्ञान करवाने वाला आवेदन है | यह आवेदन किसी भी शासकीय कार्यालय में जमा करवाने पर... जन सूचना अधिकारी से प्राप्त होने वाली प्रतिक्रिया के आधार पर उसके कार्यों की समीक्षा करने का विधि सम्मत आधार और दस्तावेजीक प्रमाण आवेदक को दिलवाता है | सरल और चालु भाषा में कहा जाय तो यह आवेदन जन सूचना अधिकारी को पदेन कर्तव्यों के प्रति कर्तव्य निष्ठा सिखाता है और उसे मात्र एक आवेदन से क़ानूनी सबक सिखाने वाला आवेदन है...     पत्र क्रमांक :- RTI-धारा 4 ...

क्या आप..! आपकी कलम को..! इतना सशक्त बनाना चाहते हैं कि... आप अपने नागरिक अधिकार का प्रयोग करके... किसी भी शासकीय विभाग द्वारा संचालित जन हिताय कार्यवाहियों की प्रशासकीय पारदर्शिता सुनिश्चित करवा सकें... यदि आप ऐसा चाहते हैं तो इस लेख को अवश्य पढ़ें...

एक पहल जो कागज कलम तक सिमित है ! लोकतांत्रिक व्यवस्था में शासकीय विभाग की कार्यवाहियों को पारदर्शिता के दायरे में लाने का सशक्त माध्यम है सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 इस अधिनियम के व्यवहारिक पहलू को जानने के लिए पांच पड़ाव सहायक साबित होते है जो अग्रलिखित है :-   आपका सहायक ! प्रोफेशनल RTI आवेदन लेखक: सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रयोग हेतु सहायक व्यवसायिक सेवाएं..! जो आवेदक पक्ष को सशक्त बनाने में “ पे-एंड-यूज़-सहायक ” की भूमिका निभाती है |     नोट:- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की विधिक कार्यवाही क्षमता को अस्त्र बनाकर... लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की विधि अपेक्षा को... सुनिश्चित करवाने वाली कार्य योजना के बिंदुवार पड़ाव..! आप भी जान लीजिये |   पहला पड़ाव आवेदन कॉपी करें : इस वेबसाइट पर प्रकाशित सभी आवेदनों को कॉपी करके word या doc में पेस्ट कर लीजिए और प्रिंट कर दीजिए | सभी प्रकाशित आवेदन निःशुल्क हैं | दूसरा पड़ाव सतत प्रकाशित होने वाले आवेदन तुरंत प्राप्त करें : आवेदको...

रण नीति बनाने के लिए RTl सूत्र wwHww के आधार पर विचार करके तो देखिए ! इन पांच प्रश्नों के दृष्टिकोण आपको सहयोगी साबित होंगे

रण नीति क्यों ? सूचना का अधिकार अधिनियम ने हमे सूचना हासिल करने का अधिकार दिलवाया है लेकिन सूचना हासिल करते समय हमे अपने अधिनियमित अधिकार से कहीं अधिक महत्व सूचना हासिल करने की रणनीति बनाने को देना चाहिए क्योंकि हमे इस बात को ध्यान में रखना चाहिए की जिस जन सूचना अधिकारी से हम जानकारी / सूचना हासिल करने जा रहे है उसने तो सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 4 के विधि निर्देशों का अनुपालन नहीं किया है इसलिए हमारे सामने सूचना मांगने की नौबत आई है । याद रखिये सूचना मांगने की रणनीति बनाने का सार्थक सूत्र है RTl  सूत्र wwHww क्या है यह सूत्र जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें https://www.rtiapplication.com/2022/12/rti-rtl-wwhww.html

दमदार RTl सूत्र wwHww से... परिचित होकर… लिखिए अचूक... सूचना का अधिकार आवेदन ! और जानिए ?  

  क्यों नहीं मिलती है … वांछित सूचना ? जन सूचना अधिकारी मुझे … जानकारी क्यों नहीं देता है ? RTI आवेदक … क्या गलती करता है ? सूचना का अधिकार विफल क्यों है और सूचना नहीं मिलने का असल कारण क्या है ?   क्या आपको उपरोक्त तोनो प्रश्नों ने परेशान कर रखा है तो आपके लिए यह लेख विशेष महत्त्व रखता है पढ़िए … जन सूचना अधिकारी अक्सर इस आरोप का सामना करते हुए नजर आता है की उसने मांगी गई सूचना नहीं दी और आवेदक को उसके सूचना मांगने के अधिकार से वंचित कर दिया गया लेकिन जब इन आरोपों की वस्तुस्थिति का विधिक दृष्टिकोण से विश्लेषण होता है तो यह तथ्य सामने आता है की आवेदक ने अपने आवेदन लेखन में ऐसी गलतियां की है जिसका फायदा उठाकर जन सूचना अधिकारी ने सूचना के अधिकार आवेदन को खारिज कर दिया और वांछित सूचना तक आवेदक की पहुंचा स्थापित नहीं होने दी इसलिए ऐसे मामले में जन सूचना अधिकारी और आवेदक दोनो ही विधिक दृष्टिकोण से जिम्मेदार होते है और वांछित सूचना नहीं मिलती है लेकिन आप ऐसी गलतियों को करने से बच सकते है   “बस ध्यान में रखिए” ! RTI सूत्र wwHww   स...