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RTI अधिकारियों (PIO) के लिए व्यावहारिक सीख देती है सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4 उल्लेखनीय है कि, धारा 4 का पालन करना किसी भी विभाग के लिए सिरदर्द नहीं, बल्कि काम आसान करने का जरिया है। अगर विभाग की वेबसाइट पर ये सभी 17 बिंदु (Pro-active Disclosure) नियमित रूप से अपडेटेड रहेंगे, तो दफ्तर में आने वाली RTI अर्जियों की संख्या में अपने आप 70% से 80% तक की कमी आ जायेगी

सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 की धारा 4 (Section 4) इस कानून की सबसे महत्वपूर्ण धाराओं में से एक है। इसे "प्रो-एक्टिव डिस्क्लोजर" (Pro-active Disclosure) यानी "स्वतः घोषणा" का नियम भी कहा जाता है।



RTI Sec 4 का सीधा मतलब यह है कि, सरकारी विभागों (Public Authorities) को जनता के मांगे बिना ही, अपने आप महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक करनी होंगी ताकि लोगों को RTI लगाने की जरूरत ही कम से कम पड़े।

RTI अधिकारियों (PIOs) और नागरिकों के समझने के लिए इसके मुख्य कानूनी निर्देश निम्नलिखित हैं:


1. रिकॉर्ड्स का रखरखाव और कंप्यूटरीकरण (धारा 4(1)(a))

  • व्यवस्थित रिकॉर्ड: सभी सरकारी विभागों को अपने रिकॉर्ड्स को इस तरह इंडेक्स और कैटलॉग करके रखना होगा जिससे उन्हें ढूंढना आसान हो।

  • डिजिटलीकरण: कानून लागू होने के बाद, सभी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड्स को कंप्यूटर पर सुरक्षित (Digitize) करना और उन्हें नेटवर्क से जोड़ना जरूरी है ताकि देश भर में कहीं से भी जानकारी आसानी से मिल सके।

2. 120 दिनों के भीतर 17 बिंदुओं का स्वतः प्रकाशन (धारा 4(1)(b))

हर सार्वजनिक प्राधिकरण को अपने संगठन से जुड़ी 17 तरह की जानकारियां खुद ही प्रकाशित (वेबसाइट या ब्रोशर पर) करनी होती हैं। इनमें मुख्य हैं:

  • संगठन के कार्य, कर्तव्य और उसकी संरचना।

  • अधिकारियों और कर्मचारियों के पास मौजूद कानूनी शक्तियां और जिम्मेदारियां।

  • निर्णय लेने की प्रक्रिया (Decision-making process) और जवाबदेही तय करने के नियम।

  • कर्मचारियों को मिलने वाला मासिक वेतन और मुआवजा।

  • विभाग का बजट, आवंटित राशि और खर्च का पूरा ब्यौरा।

  • सब्सिडी कार्यक्रमों की योजनाएं, विवरण और उसके लाभार्थियों की सूची।

3. महत्वपूर्ण नीतियों और फैसलों का कारण बताना (धारा 4(1)(c) और (d))

  • नीति निर्माण की घोषणा: जब भी कोई विभाग जनता को प्रभावित करने वाली कोई बड़ी नीति (Policy) बनाता है या फैसला लेता है, तो उसे उससे जुड़े सभी महत्वपूर्ण तथ्य खुद ही उजागर करने होंगे।

  • न्यायिक/प्रशासनिक फैसलों का आधार: प्रभावित होने वाले व्यक्तियों ( can be public or specific group) को यह जानने का हक है कि विभाग ने कोई प्रशासनिक या अर्ध-न्यायिक फैसला किस आधार पर लिया है।

4. इंटरनेट और स्थानीय भाषा का अधिकतम उपयोग (धारा 4(2), (3) और (4))

  • कम से कम RTI की जरूरत: विभागों को इंटरनेट, अखबार, नोटिस बोर्ड या पब्लिक अनाउंसमेंट के जरिए इतनी जानकारी खुद ही दे देनी चाहिए कि जनता को सूचना पाने के लिए RTI कानून का सहारा कम से कम लेना पड़े।

  • स्थानीय भाषा (Local Language): सारी जानकारियां स्थानीय भाषा और सबसे प्रभावी माध्यम (जैसे विभाग की वेबसाइट) पर उपलब्ध होनी चाहिए।

  • सस्ती या मुफ्त जानकारी: स्वतः घोषित की गई जानकारियां या तो बिल्कुल मुफ्त होनी चाहिए या फिर प्रिंटिंग की न्यूनतम लागत (जैसे प्रति पेज ₹2) पर उपलब्ध होनी चाहिए।

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